सिंह राशि का विवरण

सिंह राशि का विवरण
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जयसियाराम, सभी पाठकों को मेरा नमस्कार मित्रों इससे पहले वाले लेख में मैंने कर्क राशि के ऊपर काफी कुछ लिखा था, मुझे विश्वास है कि आप लोगों की समझ में आया होगा, आज उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हम आगे की राशि सिंह राशि का विवरण के बारे में चर्चा करेंगे।

    मित्रों अगर कहीं भी आपको कुंडली के अंदर 5 नंबर लिखा दिखाई देता है तो आपको स्वत: ही समझना होगा कि यह (5) अंक सिंह राशि के लिए प्रयुक्त हो रहा है। जन्म कुंडली के अंदर जो सिंह राशि का क्रम है वह पांच नंबर पर आता है, सही शब्दों में कहा जाय तो सिंह राशि का ज्योतिष शास्त्र में जो क्रम है वह 5 ही है। और 5 अंक से ही इसको प्रदर्शित किया जाता है।

प्रिय पाठको सिंह राशि का भचक्र पर फैलाव 121 अंश से लेकर 150 अंश तक होता है, 121 अंश से लेकर 150 अंश तक जो नक्षत्र आते हैं उनके मिलने से ही सिंह राशि बनती है। सिंह राशि का निर्माण करने वाले नक्षत्र क्रमशः मघा, पूर्वाफाल्गुनी एवं उत्तराफाल्गुनी हैं। 

मित्रों यहां पर यह जानने की आवश्यकता है कि प्रत्येक राशि नक्षत्रों के पंक्ति वद्ध 9 चरणों के मिलने से बनती है तो सिंह राशि किन 9 नक्षत्रों से बनेगी ?  इसका उत्तर सरल है मघा नक्षत्र के चार चरण, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चार चरण, और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का एक चरण मिलाकर सिंह राशि का गठन होता है।
  • वृषभ राशि का सम्पूर्ण परिचय Click Hear To Read

वह जातक जो मघा नक्षत्र के पहले चरण में जन्म लेते हैं उनका नाम अक्षर “मा” से प्रारम्भ होता है। जब कोई जातक मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म लेता है तो उसका नाम अक्षर “मी” से प्रारम्भ होता है। मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में जब कोई जातक जन्म लेता है तो नाम अक्षर “मू” से प्रारम्भ होता है। मघा नक्षत्र के चौथे चरण में अगर कोई जातक जन्म लेता है तो उसके नाम का अक्षर “मे” से प्रारम्भ होता है।

  • मिथुन राशि का सम्पूर्ण परिचय Click Hear To Read

मघा नक्षत्र में जन्म होने पर राशि सिंह राशि, स्वामी सूर्य, योनि मूषक, गण राक्षस, वर्ण क्षत्रिय, युज्जा मध्य, हंस वायु, नाड़ी आदि, वश्य चतुष्पाद, पाया चांदी, वर्ण मूषक होता है। अगर जातक के जन्म समय में मघा नक्षत्र प्रगति पर हो तो जन्म के समय केतु की महादशा प्रगति पर होती है। इसी क्रम में सिंह राशि के अंदर जो दूसरा नक्षत्र होता है उसका नाम है पूर्वाफाल्गुनी। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के पहले चरण में अगर किसी जातक का जन्म होता है तो उस जातक नाम “मो” अक्षर से प्रारम्भ होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे चरण में किसी जातक का जन्म हो तो नाम “टा” अक्षर से प्रारम्भ होता है।

  • कर्क राशि का सम्पूर्ण परिचय Click Hear TO Read

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के तीसरे चरण में अगर किसी जातक का जन्म हो तो नाम “टी” अक्षर प्रारम्भ होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने पर जातक का नाम “टू” अक्षर से आरंभ होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म होने पर सिंह राशि होती है, स्वामी सूर्य होते हैं, योनि मूषक, गण मनुष्य, वर्ण क्षत्रिय, युज्जा मध्य, हंस वायु, नाड़ी मध्य, वश्य चतुष्पाद, पाया चांदी होता है, पहले चरण में जन्म लेने पर जो वर्ग होता है वह मूषक होता है बाद के 3 चरणों में अगर जन्म हो तो वर्ग स्वान होता है। अगर जन्म के समय पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रगति पर हो तो जन्म के समय शुक्र की महादशा प्रगति पर होती है।

प्रिय पाठको सिंह राशि के गठन में एक और नक्षत्र की भूमिका रहती है वह उत्तराफाल्गुनी का प्रथम चरण, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में अगर बच्चे का जन्म होता है तो नाम जातक का नाम “टे” अक्षर से प्रारम्भ होता है। उत्तराफाल्गुनी नक्शत्र में जन्म होने पर राशि सिंह होती है, स्वामी सूर्य, गौ योनि, गण मनुष्य, वर्ण क्षत्रिय, युज्जा मध्य, हंस वायु, नाड़ी आद्य, वश्य चतुष्पाद, पाया चांदी, वर्ग स्वान होता है। अगर जातक का जन्म उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में होता है तो उसके ऊपर जन्मकालिक सूर्य की महादशा प्रगति पर होती है।

सिंह राशि का चिन्ह शेर होता है, स्वामी सूर्य होते हैं, यह अग्नि तत्व की राशि है, इसका स्वरूप स्थिर है, पूर्व दिशा में बली होती है, लिंग पुरुष, चतुष्पाद, जाति से क्षत्रिय, क्रूर स्वभाव, पित्त प्रकृति, इस राशि का अधिकार हृदय पर है। जीवन का रत्न माणिक, अनुकूल रंग चमकीला श्वेत, पीला, भगवा होता है, शुभ दिवस रविवार व बुधवार, अनुकूल देवता सूर्य, व्रत उपवास रविवार का करें अनुकूल अंक एक है अनुकूल तारीखें 1/18/19/28 होतीं हैं, सिंह की मित्र राशियां मिथुन, कन्या, मेष व धनु है, सिंह राशि की शत्रु राशि वृष, तुला, मकर व कुंभ है।

इस राशि के व्यक्ति प्रबल पराक्रमी, महत्वाकांक्षी, अधिकार प्रियता होते हैं। सिंह राशि के जातकों के सकारात्मक तथ्य खुले दिल दिमाग वाले होते हैं, उदारमान और गर्मजोशी वाले होते हैं। सिंह राशि वालों के लिए नकारात्मक तथ्य है घमंडी होना, अति आत्मविश्वास होना, अति महत्वाकांक्षी होना, और महत्वाकांक्षा का प्रदर्शन भी अत्यधिक करते हैं। 

    प्रिय पाठको मैंने इस लेख में सिंह राशि का पूरा परिचय देने की कोशिश की है और आशा करता हूं कि मेरे जो नियमित पाठक है वह इन लेखों से लाभान्वित भी अवश्य हो रहे होंगे। आप लोगों में से कोई भी पाठक जो किसी समस्या से ग्रसित है और उस समस्या का ज्योतिषीय समाधान चाहते हैं, तो वह हमें कमेंट बॉक्स में लिख कर समाधान पा सकते हैं।

    प्रिय पाठको हमारी ओर से सशुल्क(Paid Cunsultation) परामर्श भी आप लोगों को दिया जाता है, जिसके लिए नीचे लिखे नंबर पर आप संपर्क कर के निश्चित शुल्क देकर परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। आज के लेख में इतना ही अब हमें आज्ञा दीजिए आपका आने वाला दिन शुभ हो नमस्कार जय सियाराम।

 

  ग्रह 

केतु

शुक्र

सूर्य

चंद्र

मंगल

राहु

गुरु

शनि

बुध

नक्षत्र 

अश्विनी

भरणी

कृत्तिका

रोहिणी

मृगशिरा

आर्द्रा

पुनर्वसु

पुष्य

आश्लेषा

नक्षत्र के नामाक्षर 

चूचेचो ,ला

लीलूलेलो

विवू

वेवोका,की

कू,

केकोहि

हुहेहोडा

डीडुडेड़ो

 

नक्षत्र

मघा

पूर्वाफाल्गुनी

उत्तराफाल्गुनी

हस्त

चित्रा

स्वाती

विशाखा

अनुराधा

ज्येष्ठा

नक्षत्र के नामाक्षर

म़ामीमूमे

मोटाटीटू

टे, ढोपापी

पू

पेपोरारी

रूरेरोता

तीतूतेतो

नानीनूने

नोयायीयू

 

नक्षत्र

मूल

पूर्वाषाढ़ा

उत्तराषाढ़ा

श्रवण

धनिष्ठा

शतभिषा

पूर्वाभाद्रपद

उत्तराभाद्रपद

रेवती

नक्षत्र के नामाक्षर

येयोभाभी

भू

भेभोजाजी

खीखूखेखो

गीगूगे

गोसासीसू

सेसोदादी

दू,,

देदोचाची




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